स्वामी सानंद (प्रो. जी. डी. अग्रवाल) की जयंती पर तरुण आश्रम में स्थापित हुआ ‘सानंद तुलसी बाग :- डॉ राजेंद्र सिंह जलपुरुष
सत्य, अहिंसा, गंगा और प्रकृति के अनन्य साधक स्वामी सानंद (प्रो. जी. डी. अग्रवाल)

सत्य, अहिंसा, गंगा और प्रकृति के अनन्य साधक स्वामी सानंद ( प्रो. जी. डी. अग्रवाल )
स्वामी सानंद (प्रो. जी. डी. अग्रवाल) की जयंती पर तरुण आश्रम में स्थापित हुआ ‘सानंद तुलसी बाग :- डॉ राजेंद्र सिंह जलपुरुष
**भीकमपुरा, 20 जुलाई 2026।**
स्वामी सानंद (प्रोफेसर जी. डी. अग्रवाल) की जयंती के अवसर पर तरुण भारत संघ ने भीकमपुरा स्थित तरुण आश्रम में उनके त्याग, तपस्या और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित जीवन को नमन करते हुए **’सानंद तुलसी बाग’** की स्थापना की। आश्रम में प्रवेश करते ही बाईं ओर विकसित इस पूरे उद्यान में तुलसी के पौधे रोपित किए गए, जो गंगा, प्रकृति और जीवन के प्रति स्वामी सानंद की साधना का जीवंत प्रतीक है।
तरुण भारत संघ प्रत्येक वर्ष स्वामी सानंद की जयंती पर कोई नया रचनात्मक कार्य करता है। इस वर्ष जल पुरुष राजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में आश्रम परिसर में ‘सानंद तुलसी बाग’ की स्थापना की गई। संघ के सभी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से तुलसी का पौधारोपण कर स्वामी सानंद के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

प्रोफेसर जी. डी. अग्रवाल का योगदान केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत रहा। उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की और बाद में अमेरिका के बर्कले विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि अर्जित की। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में अध्यापन किया तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के स्थापना सचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके नेतृत्व में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण नियंत्रण के वैज्ञानिक मानक विकसित किए और उद्योगों को प्रदूषण-मुक्त तकनीकों की दिशा में प्रेरित किया। उस समय बोर्ड का उद्देश्य प्रदूषण को रोकना और नियंत्रित करना था। आज यह व्यापक चिंता व्यक्त की जाती है कि बोर्ड की भूमिका पहले जैसी प्रभावी और मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं रह गई है।
स्वामी सानंद ने अपने जीवन का अंतिम अध्याय भी गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए समर्पित कर दिया। 86 वर्ष की आयु में उन्होंने गंगा संरक्षण की मांग को लेकर कठोर अनशन किया और 111वें दिन, **11 अक्टूबर 2018** को अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका यह तप, त्याग और समर्पण आज भी देश के युवाओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को प्रेरित करता है।
हाल के जंतर-मंतर आंदोलन के संदर्भ में भी अनेक लोगों ने स्वामी सानंद के संघर्ष और तपस्या को स्मरण किया। आंदोलन में शामिल लोगों ने उनके शांतिपूर्ण और अहिंसक संघर्ष को प्रेरणा का स्रोत बताया। इस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं का कहना था कि स्वामी सानंद का जीवन सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण जनसंघर्ष का उदाहरण था तथा भारत की पहचान भी सत्य और अहिंसा के मूल्यों से ही बनती है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी कहा कि स्वामी सानंद ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण नदियों, पर्यावरण और समाज के हित में समर्पित किया। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना, तप, त्याग और निरंतर प्रयासों से संभव है।

तरुण भारत संघ ने संकल्प व्यक्त किया कि ‘सानंद तुलसी बाग’ केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि प्रकृति, गंगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज की सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगा। यह बाग आने वाली पीढ़ियों को स्वामी सानंद के सत्य, त्याग, तपस्या और पर्यावरण संरक्षण के संदेश की निरंतर याद दिलाता रहेगा।
इसके साथ ही 20 जुलाई को देशभर के युवाओं द्वारा संसद के घेराव और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आयोजित शांतिपूर्ण सत्याग्रह का भी स्वागत किया। स्वामी सानंद का जन्मदिन और इसी दिन युवाओं द्वारा अपनी लोकशक्ति का शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक संयोग है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं ने जंतर-मंतर पर एकत्र होकर लोकतांत्रिक मूल्यों, जनभागीदारी और जनसरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा संसद तक अपनी आवाज़ पहुँचाने का प्रयास किया।
प्रोफेसर जी. डी. अग्रवाल का पूरा जीवन सत्य, अहिंसा, तपस्या और जनआंदोलनों की नैतिक शक्ति का उदाहरण रहा। उन्होंने गंगा, नदियों और पर्यावरण की रक्षा के लिए सदैव शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष का मार्ग अपनाया। इसलिए उनके जन्मदिन पर आयोजित इस व्यापक जनसत्याग्रह को उनके जीवन-दर्शन और संघर्ष की परंपरा से जोड़कर देखना स्वाभाविक है।

स्वामी सानंद का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की जागरूक भागीदारी, सत्य, अहिंसा और नैतिक साहस में निहित है। उनके जीवन का संघर्ष केवल गंगा को बचाने का नहीं था, बल्कि प्रकृति, समाज और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का भी था। इसी भावना के साथ तरुण भारत संघ ने उनके जन्मदिन पर स्थापित **’सानंद तुलसी बाग’** को पर्यावरण संरक्षण और जनचेतना के स्थायी प्रतीक के रूप में समाज को समर्पित किया।
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