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पुनर्जीवन से ही अरावली बचेगी लेखक- जलपुरुष राजेन्द्र सिंह —

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पुनर्जीवन से ही अरावली बचेगी
लेखक- जलपुरुष राजेन्द्र सिंह

अच्छे निर्णय कराके, अरावली पुनर्जीवन प्रक्रिया वर्ष 2026 में तेज होगी। यह वर्ष अरावली और हमारी पृथ्वी के लिए ‘भारतीय आस्था में संरक्षण’ का वर्ष है। ‘लालची विकास’ के स्थान पर ‘सनातन विकास’ की प्रक्रिया शुरु होगी। सनातन ‘सदैव नित्य-नूतन-निर्माण’ है। ‘चरैवेति चरैवेति आदि अनंत है’ यही सनातन है, जो सदैव ही चलता रहता है। इसका न कोई आरंभ है, न अंत। लेकिन इंसान, जो इसका अंतिम प्राणी है, अब लालची बनकर बड़ी-बड़ी मशीनों से इसे नष्ट कर रहा है। वह सनातन सिद्धांत के विपरीत चलकर स्वयं को भी नष्ट करता है। वही ‘प्रलय’ बन जाती है। जलवायु परिवर्तन ‘आपदा’ को ही हम भारतीय प्रलय कहते है, अब हम प्रलय के दौर से गुजर रहे हैं।
इस वर्ष में पृथ्वी की संतान अपनी मां से प्रार्थना कर रही हैं- ‘ *यो नो द्वेषत् पृथिवि यः पृतन्याद् भिदासान्मनसा यो वधेन। तं नो भूमे रन्धय पूर्वकृत्वरि।।’* (अथर्ववेदः कां. १२, सू. १, मं. १४) हे पृथ्वी मां! जो आपसे द्वेष करते हैं, उनका आप वध करती है। हे भूमि! ऐसे प्राणी जो आपके लिए कष्टदायक हैं, उन्हें आप रौंद देती हैं। उन्हें अपने ऊपर जीवन नहीं देती है। यह प्रथ्वी प्रार्थना हमारे अर्थववेद में है। सभी प्राणी आपसे शांति और शक्ति प्राप्त करके, आपको सबका पोषण करने में सेवक और सहयोगी बनने की इच्छा रखते हैं। क्योंकि हम सत्य-अहिंसा में ही विश्वास रखते है।
गत वर्ष में ‘मां अरावली’ को जो नया कष्ट पृथ्वी से द्वेष करने वालों ने दिया है, उसे इस वर्ष 2026 में अरावली के बेटे-बेटियां सभी प्राणी, पेड़-पौधे जो अरावली से प्यार और सम्मान करते हैं, सब मिलकर संगठित शक्ति प्राप्त करके अन्न्जल हेतु पोषित करने का काम करेंगे। आपके स्नेह से आपके प्रति हमारा सम्मान और स्नेह का एक नया योग बनेगा। हम विनम्र बनकर कार्य करने की प्रेरणा आपसे मिल गई है। आपसे द्वेष रखने वाले लालची, मशीनी आदमी को बदलने की तैयारी कर सकेंगे।
‘समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते। विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥
हम पृथ्वी पाद स्पर्श भी क्षमा-याचना के साथ करते हैं। हम जानते हैं ‘समुद्र’ में आपका वास है, पर्वत आपके स्तन हैं, ये ही हमें पोषित करते रहते हैं। आपके स्तन काटने वालों का हृदय परिवर्तन करने की जिम्मेदारी इस वर्ष में ले रहे है। आप भी उन्हें क्षमा करेंगे तो फिर आपको चाहने वाले भूखे मरेंगे, आपसे उजड़ेंगे। आपको खनन से काटने वाले हमें सबको मारना और उजाड़ना चाहते हैं, इनकी इच्छा हम पूर्ण नहीं होने देंगे। वे तो संख्या में बहुत ही कम हैं। वे लक्ष्मी के पति बनने के लालची हैं। उनका लालच किसी को भी जीने नहीं देता है। हम ‘जीयो और जीने दो’ में विश्वास रखते हैं, इसलिए लालच पूर्ति करके जीवन के आधार ‘अरावली पर्वत’ को नष्ट करने वालों का मन-मस्तिष्क बदलने में शांतिमयशक्ति हमें आपने प्रदान कर दी है।
विष्णु पत्नी तो सभी पेड़, पौधे और जीव-जंतुओं की मां हैं, सभी को जीवित रखने वाली हैं। सदैव सभी की रक्षा करेगी। इस वर्ष हम पर अधिक ध्यान रखना होगा, तभी आपकी सनातन प्रक्रिया चलेगी। अन्यथा लालची हम सबको नष्ट कर देगें। ये तो आपके नष्ट करने के लिए लक्ष्मी को अपने कब्जे में ले लिए है।
लक्ष्मी ने बहुत बड़ी-बड़ी अदृश्य मशीनें बना ली हैं। ये सब पृथ्वी, पहाड़, समुद्र और नदियों को शोषित और प्रदूषित करके मार रही हैं। अब आपके बेटे-बेटियों की आत्मा पर आपका वास है। उनका मस्तिष्क और बुद्धि लक्ष्मी से दूर पृथ्वी पर्वत की ओर मुड़ गई है। हम सभी की बुद्धि और मस्तिष्क तो पृथ्वी; नदी जल, जंगल पहाड़ बचाने में लग गयी है। हमारी आत्मा पर प्रकृति-संस्कृति का वास होगा, तभी हमारी बुद्धि प्रकृति-संस्कृति का डिजाइन बनाने में साथ जुड़ेगी।
समता और सादगी से अपने जीवन को पृथ्वी, प्रकृति संरक्षण कार्यों में ही लगा रहे है। हर क्षण हमारा अन्न्जल सृजन में लगी प्रकृति-संस्कृति को हम सम्मान देते हैं। अब प्रकृति को सबकी बुद्धि पर बैठना सभी से अच्छे निर्णय कराना है। प्रकृति, अरावली पर्वत को सनातन विरासत बनाकर रखने हेतु न्यायपालिका, विद्यापालिका, कार्यपालिका से अच्छे निर्णय होंगे। अब लक्ष्मी नहीं, पृथ्वी की प्रसन्नता और हरियाली के लिए अच्छे निर्णय कराकर, हम अरावली पुनर्जीवन हेतु अच्छे कार्यों में लग रहे है।
अरावली में विनाशक कार्य रूकने के बाद ही पुनर्जीवन कार्य शुरू होते है। जैसे अलवर के राजगढ़ तहसील की तिलवाड़ी, तिलवाड़, पालपुर, थानागाजी के कालेड़, समरा, हमीरपुर आदि गांवों में जल, जंगल, जंगलीजीव, जंगलवासियों के संरक्षण कार्य शुरु हुए। यहां के उजड़े लोग अपनी जमीन पर खेती करने लगे, जिससे हरियाली बढ़ गई और पहाड़ पुनर्जीवित हो गया है। ऐसा ही कामों की सम्पूर्ण अरावली में जरूरत है; वर्ष 2026 में यह पुनर्जीवन प्रक्रिया जरूर शुरु होगी।

 

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गोदावरी शुक्राचार्य

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