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अफ्रीका, सोमालिया और अन्य देशों से आए सरकारी अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के दल ने तरुण भारत संघ द्वारा पुनर्जीवित की गई नदियों का भ्रमण किया।

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अफ्रीका, सोमालिया और अन्य देशों से आए सरकारी अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के दल ने तरुण भारत संघ द्वारा पुनर्जीवित की गई नदियों का भ्रमण किया।

 

 


27-28 सितंबर 2026 को अफ्रीका, सोमालिया और अन्य देशों से आए सरकारी अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के दल ने तरुण भारत संघ द्वारा पुनर्जीवित की गई पाँच नदियों का भ्रमण किया। उन्होंने देखा और समझा कि नदियों को पुनर्जीवित करने से किस प्रकार समाज हिंसक प्रवृत्तियों को छोड़कर अहिंसा और अनुशासित प्रेम की ओर बढ़ सकता है। सोमालिया की हिंसा को जल-कार्य के माध्यम से अहिंसा और सामाजिक सौहार्द में बदलने के उद्देश्य से यह दल तरुण भारत संघ आया।
यात्रा के दौरान दल ने करौली और धौलपुर जिले की तेवर, सेरनी और बमाया नदियों का भ्रमण किया। इसके बाद अलवर जिले की अरवरी और सरसा नदियों को भी देखा। तेवर और सेरनी नदियों के जल-प्रवाह को देखकर दल के सदस्य आश्चर्यचकित हुए। सबसे अधिक आश्चर्य उन्हें अरोदा गाँव में धरती के भीतर से निकलती भूजल की धारा को देखकर हुआ। उन्होंने गाँव के लोगों से इसके बारे में अनेक सवाल पूछे। अरोदा गाँव के सियाराम गुर्जर ने उनके सवालों के जवाब दिए। इसके बाद दल के सदस्यों ने हिंदी में नारे लगाए “बाढ़, सुखाड़ मुक्ति का मॉडल तरुण भारत संघ।” वे बहुत आनंदित होकर अपनी दोनों बसों में वापस बैठे और करौली की ओर रवाना हुए। देर रात तक रास्ते में बातचीत होती रही।
तेवर नदी के प्रवाह और बमाया नदी को देखने के बाद दल ने वहाँ के समुदायों से भी लंबी बातचीत की। अगले दिन, 28 सितंबर को, यह दल सुबह लगभग छह बजे करौली से तरुण आश्रम, भीकमपुरा के लिए रवाना हुआ।
रास्ते में उन्होंने अरवरी नदी को देखा, जहाँ वह स्वच्छ और सदानीरा होकर बह रही थी। इसके बाद सरसा नदी को सरसा मंदिर के पास, अजबगढ़ और भीकमपुरा के पास देखा। भीकमपुरा पहुँचकर तरुण भारत संघ की वैश्विक जल प्रयोगशाला में दल के सदस्यों ने भूजल पुनर्भरण के विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग को गहराई से समझा।
इसके बाद यात्रा दल अरवरी नदी के गाँवों से होते हुए जयपुर के लिए रवाना हुआ। रास्ते में हुई बैठक में भीकमपुरा के गोपाल सिंह और छोटे लाल ने नदियों के नक्शे पर जीआईएस की साइटें दिखाते हुए समझाया कि यह काम तकनीकी रूप से बहुत सरल है, लेकिन इसकी सफलता समाज की शक्ति से संभव हुई है। समाज की शक्ति से किए गए इस काम के कारण अब यह क्षेत्र सुखद, सक्षम और समृद्ध बन गया है।
यात्रा के दौरान तरुण भारत संघ के परिसर में एक सभा भी आयोजित की गई, जिसमें सोमालिया में जल-कार्य शुरू करने के आगे के रास्ते पर चर्चा की गई। दल के सदस्यों ने तरुण भारत संघ के साथियों को सोमालिया बुलाकर वहाँ के जल संकट के समाधान के लिए मार्गदर्शन और सहयोग देने का भी निवेदन किया।
इस यात्रा के दौरान तरुण भारत संघ के साथ पुराने समय से काम करने वाले श्री रमेश मुकल्ला और डॉ. अब्दुल्ला आल्मी ने दल का भारत दौरा कराया। इन दोनों के साथ जल पुरुष राजेंद्र सिंह की उपस्थिति में दो दिनों तक करौली तथा अलवर स्थित तरुण आश्रम में गहन विचार-विमर्श हुआ। यात्राओं और चर्चाओं के बाद दल के सदस्यों के मन में अनेक सवाल थे। उन सवालों के समाधान खोजने के लिए गंभीर प्रयास किए गए। इस प्रयास का परिणाम बहुत सार्थक रहा और सभी ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि जिस तरह तरुण भारत संघ ने चंबल क्षेत्र की हिंसा को अहिंसा में बदलने का काम किया, उसी तरह सोमालिया में भी परिवर्तन संभव है।
चर्चा में यह बात सामने आई कि भूखा और प्यासा व्यक्ति जब जीवन की बुनियादी जरूरतों से वंचित होता है तो हिंसा की ओर उन्मुख हो सकता है। इसलिए यदि लोगों की भूख और प्यास मिटाकर उन्हें पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जाए, तो वे लाचार, बेकार और मानसिक रूप से परेशान रहने के बजाय स्नेह, सहयोग और हरियाली के कामों में आगे बढ़ सकते हैं।


तरुण भारत संघ में दल के नेता अब्दुल्ला आल्मी और रमेश मुकल्ला को साफा पहनाकर सम्मानित किया गया तथा तभासं की महिलाकार्यकर्ताओं ने सोमालिया से आई की तीन महिलाओं को लूगड़ी ओढ़ाकर सम्मान दिया गया। दल के सदस्यों ने तरुण भारत संघ के कार्यकर्ताओं से अपने देश में आकर वहाँ के समाज में इस अद्भुत परिवर्तन को दोहराने में सहयोग करने का अनुरोध किया।
तरुण भारत संघ के कार्यकर्ताओं ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए कहा कि जब सोमालिया में इसकी तैयारी होगी, वे वहाँ भी आकर जल और समाज के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि वे पूरी दुनिया को अपनी दुनिया मानते हैं और जहाँ भी लोग पानी के लिए काम करने को तैयार हैं, वहाँ अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार समर्पित भाव से काम करेंगे।
इसके बाद यह यात्रा दल तरुण भारत संघ के अन्य कार्यों को देखने के लिए जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर की ओर रवाना हुआ।

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गोदावरी शुक्राचार्य

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