जल सारथी से जल नायक बनने की यात्रा :- डॉ राजेंद्र सिंह जलपुरुष

जल सारथी से जल नायक बनने की यात्रा
डॉ राजेंद्र सिंह जलपुरुष

विश्व युवा केन्द्र नई दिल्ली में ’’जल सारथी सम्मेलन’’ का आयोजन “वाटर एड” द्वारा किया गया। इसमें देशभर से आए जल संरक्षण के प्रति समर्पित लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के तौर पर जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी ने कहा कि, ’’जल सारथी से जल नायक बनने की शुरुआत जल के प्रति प्रेम से होती है।’’ जब व्यक्ति के विचारों की सीमाएँ टूटती हैं और उसके मन में जल के प्रति संवेदनशीलता जागती है, तभी वास्तविक जल क्रांति का आरंभ होता है।
आज भारत जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। बेमौसम वर्षा, भीषण गर्मी, जंगलों में आग, बाढ़, सूखा और तूफान बढ़ रहे है। ऐसे समय में जल सारथियों का उद्देश्य केवल जल संरक्षण का संदेश देना नहीं, बल्कि जल संकट का स्थायी समाधान खोजना है।
इसके लिए सबसे पहले जल को समझना, उसका सम्मान करना, उसे सहेजना और जल संरक्षण के लिए जन-जागरण तथा आवश्यक होने पर जल सत्याग्रह करना होगा। जल निर्माण और संरक्षण की प्रक्रिया का पहला आधार जल के प्रति प्रेम है। जब प्रेम उत्पन्न होता है, तब जल को समझने की इच्छा जागती है। समझ से विश्वास पैदा होता है, विश्वास से जल का एहसास और आभास होता है, और यही एहसास व्यक्ति को जल संरक्षण के कार्य के प्रति समर्पित बना देता है। यह प्रकृति की सहज, सरल और स्वाभाविक प्रक्रिया है।
इस परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के मन और विचारों से होती है। जब उसके दिमाग की जड़ सोच की दीवारें हिलती हैं, तभी वह परिवर्तनकारी और क्रांतिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ता है। यही जल क्रांति का वास्तविक आधार है।
एक सच्चे जल सारथी का दायित्व है कि वह जल को समझे, उसे सहेजे, समाज को संगठित करे तथा जल प्रदूषण, जल स्रोतों पर अतिक्रमण और जल के शोषण को रोकने के लिए सत्याग्रही बने। सत्य, सेवा और सहयोग के मार्ग पर चलकर ही जल संरक्षण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
यदि हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य बनाना है, तो जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा।
इस सम्मेलन में रामधीरज सिंह, एड विक्रांत सिंह, एड. हिरेंद्र, रोहित और 11 राज्यों के जल सारथी शामिल रहे।





