धान किसानों के आंदोलन का जलपुरुष डॉ राजेंद्र सिंह ने समर्थन किया

धान किसानों के आंदोलन का जलपुरुष डॉ राजेंद्र सिंह ने समर्थन किया
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कालाहांडी, उड़ीसा
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2 जून 2026 को भवानीपटना से बालदा कोरापुट यात्रा के दौरान जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने किसानों के आंदोलन में शामिल होकर उनका समर्थन किया। किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि धान की फसल तैयार होने के बावजूद सरकारी खरीद नहीं होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। खेतों में तैयार फसल और खरीदा जाने वाला धान खुले में पड़ा है, जो लगातार हो रही बारिश के कारण बर्बाद हो रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार ने सिंचाई की व्यवस्था तो उपलब्ध कराई, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में धान का उत्पादन बढ़ा, लेकिन अब उपज की खरीद नहीं होने से उनकी मेहनत पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
किसानों के साथ संवाद करते हुए राजेन्द्र सिंह ने कहा कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पहले उन्हें अपनी उपज के पंजीकरण और खरीद सुनिश्चित कराने के लिए आंदोलन करना पड़ा और अब उन्हें प्रकृति के प्रकोप तथा बेमौसम बारिश से भी जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कालाहांडी जिले के कोकसरा क्षेत्र में किसानों की बदहाली की जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से किसानों ने कठिन परिश्रम और अपने संसाधनों के बल पर रबी धान की फसल तैयार की, लेकिन खरीद प्रक्रिया में देरी के कारण यह फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी-पड़ी खराब हो रही है। बेमौसम बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत और उनकी उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पहले पानी की कमी और सूखे की मार झेलता था। अब जब सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई और किसानों ने बेहतर उत्पादन किया, तब उनकी उपज की खरीद नहीं हो रही है। यही कारण है कि किसान आज सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत और पसीने की कमाई का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जो सरकार के अपने वादों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद की गारंटी की बात कही गई है, इसलिए सरकार को किसानों का धान खरीदना चाहिए। सरकारें वादे तो करती हैं, लेकिन उन्हें पूरा क्यों नहीं करतीं।
राजेन्द्र सिंह ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार गरीबी समाप्त करने के बजाय गरीबों को ही समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। उनका कहना था कि गरीबी दूर करने के लिए समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था मिलनी चाहिए, ताकि किसान और मजदूर सम्मानपूर्वक, सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी सकें। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक के जीवन और आजीविका की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसान दिन-रात मेहनत करके फसल उगाए और उसकी उपज ही न खरीदी जाए, तो उसे अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल कैसे मिलेगा और वह अपना जीवन कैसे चलाएगा, यह एक गंभीर प्रश्न है।
उन्होंने आगे कहा कि आज गांव की किसानी, गांव का पानी और गांव की जवानी—तीनों गांवों से बाहर जा रहे हैं। गांव लगातार खाली और कमजोर होते जा रहे हैं। यदि सरकार किसानों की उपज का उचित मूल्य देकर समय पर खरीद सुनिश्चित करे, तो गांव का युवा खेती की ओर लौट सकता है, कृषि समृद्ध हो सकती है और उपलब्ध जल संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकता है। उनके अनुसार सरकारों को इसी दिशा में काम करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा सरकार स्वयं को आदिवासियों और गरीबों की हितैषी बताती है, लेकिन उसकी नीतियां उद्योगपतियों के पक्ष में अधिक दिखाई देती हैं। उनका कहना था कि गरीबों और किसानों को मिलने वाले अधिकार और सुविधाएं उन्हें नहीं मिल रही हैं, जिससे यह धारणा मजबूत होती है कि सरकार गरीबी दूर करने के बजाय गरीबों की उपेक्षा कर रही है।




